Trik Bhav in Kundli: क्या है 6, 8, 12 घर का महत्व

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ज्योतिष शास्त्र में 6,8,12 घर को बुरा माना जाता है। दैनिक योग कुंडली में इन घरों को त्रिक भाव (Trik Bhav in Kundli) कहा जाता है। 6,8,12 घर को लेकर ये मान्यता है कि ये जिस भी भाव में जाएंगे, जातक को नुकसान ही पहुंचता है और इनसे शुभ फल की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। कुंडली में त्रिक भाव में हर ग्रह का फल शुभ और अशुभ दोनों होता है। उदाहरण के लिए छठे भाव में सूर्य, शनि, मंगल और राहु जातक को शुभ फल देंगे लेकिन गुरु, चंद्र, शुक्र और बुध समस्याएं पैदा करते हैं। शनि अगर अष्टम भाव में होता है तो उस जातक की आयु लंबी होती है। हर घर का अपना विशेष महत्व है और उसके अनुसार ही व्यक्ति का जीवन निर्धारित होता है।

आइये जानते हैं 6, 8, 12 घर का महत्व

  • 6,8,12 घर के स्वामी जहां भी होते हैं हमेशा नुकसान करते हैं।
  • 6,8,12 में राजयोग भी बन सकता है। कुंडली में महादशा अंतर्दशा के समय तीनो के माध्यम से व्यक्ति को लाभ मिलता है।
  • 6,8,12 घर को दुःस्थान भी कहा जाता है क्योंकि इनके बलवान होने से व्यक्ति के जीवन में संघर्ष बढ़ जाता है और शांति खत्म हो जाती है।
  • 6,8,12 को मजबूत करने के लिए रत्न धारण करना चाहिए जिससे उनका फायदा मिलता है क्योंकि लाभ देने वाले ग्रह के 6,8,12 भाव में जाने के बाद उसका रत्न धारण करने से कोई नुक्सान नहीं होता है।
  • इन्हें बुरे भाव की सूची में रखा जाता है क्योंकि 6वां घर कर्ज, बीमारी का होता है। अष्टम भाव मृत्यु का, पाताल के अंधेरे का घर होता है और 12 भाव उपभोग, मोक्ष का और खुला आकाश होता है।
  • छठा भाव व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर बहुत असर करता है। इस घर में बुध ग्रह को बहुत शक्तिशाली माना जाता है और ऐसे लोग दूसरे को बहुत प्रभावित करते हैं।
  • द्वादशांश कुंडली का राशिफल 6,8,12वे भाव में होता है तो ऐसा माना जाता है कि जातक को अपने माता-पिता का सुख व सहयोग नहीं मिलता।
  • आठवें और 12वें भाव में सभी ग्रह अशुभ होते हैं, लेकिन बारहवें भाव में शुक्र को अपवाद माना जाता है क्योंकि बारहवें भाव में शुक्र भोग का ग्रह होता है। यदि शुक्र बारहवें भाव में हो तो ऐसे जातक बहुत धनी और लोकप्रिय होते हैं।
  • 8वें भाव में सभी ग्रह अशुभ होते हैं लेकिन सूर्य या चंद्रमा कभी अशुभ नहीं होते।
  • 6वें भाव में आप कितनी भी मेहनत कर लें लेकिन कभी काम में सफल नहीं होते और 6,8,12 भाव के स्वामी जिन भावों में रहते हैं, उनमें हमेशा परेशानी पैदा करते हैं।

त्रिक भाव की सम्पूर्ण जानकारी के लिए देखें यह वीडियो:

Trik Bhav in Kundli – निष्कर्ष

6,8,12 को पीड़ा देने वाले भाव माना जाता है। इसलिए इनमें रहने वाले स्वामी, व्यक्ति के जीवन में कठिनाइयाँ, कष्ट, हानि, चिंताएँ, बाधाएँ, बीमारी, संकट, शत्रुता, दुर्घटनाएँ, सर्जरी और मृत्यु जैसे बुरे अनुभव लाते हैं। इसी वजह से इन्हें दुष्ट और अशुभ घर कहा जाता है। भाव 6, 8 और 12 अत्यंत अशुभ होते हैं। Trik bhav in Kundli का जातक के जीवन पर एक विशेष असर होता है। हर घर और उनके स्वामी का जीवन पर अलग प्रभाव पड़ता है इसलिए इनकी जानकारी होना बहुत महत्वपूर्ण है। छठे भाव में स्थित ग्रह का शुभ या अशुभ प्रभाव, व्यक्ति के जीवन पर बहुत ही सटीक होता है, इसलिए इसे उपचय भाव भी कहा जाता है जिसका मतलब है गतिशील।

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